बारिश में शरीर पर दिख रहे हैं गोल लाल चकत्ते? कहीं यह 'दाद' यानी टीनिया इन्फेक्शन तो नहीं, जानिए लक्षण और बचाव
मानसून का मौसम जहां भीषण गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह कई तरह के संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। लगातार बारिश, नमी और उमस के कारण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं। यही वजह है कि इस मौसम में त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी काफी बढ़ जाती हैं।
यदि आपकी त्वचा पर गोल आकार के लाल चकत्ते बन रहे हैं, उनमें तेज खुजली, जलन या त्वचा छिलने जैसी समस्या दिखाई दे रही है, तो इसे सामान्य एलर्जी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह टीनिया (Tinea Infection) या आम भाषा में दाद (Ringworm) का संक्रमण हो सकता है।
हालांकि इसका नाम "रिंगवर्म" है, लेकिन इसका किसी कीड़े (Worm) से कोई संबंध नहीं होता। यह एक फंगल संक्रमण है, जो त्वचा, सिर, पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित कर सकता है।
क्या है टीनिया इन्फेक्शन?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार टीनिया एक सामान्य लेकिन संक्रामक फंगल संक्रमण है, जो त्वचा की ऊपरी परत को प्रभावित करता है।
यह संक्रमण मुख्य रूप से डर्माटोफाइट (Dermatophyte) नामक फंगस के कारण होता है। यह फंगस शरीर के उन हिस्सों में तेजी से बढ़ता है जहां अधिक पसीना, नमी और गर्माहट रहती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है।
कैसे पहचानें इसके लक्षण?
अमेरिका के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान Johns Hopkins Medicine के अनुसार टीनिया संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं—
त्वचा पर गोल या अंगूठी जैसी आकृति का लाल चकत्ता
चकत्ते के किनारे अधिक लाल और उभरे हुए दिखाई देना
बीच का हिस्सा अपेक्षाकृत साफ या हल्का दिखना
तेज खुजली
जलन या चुभन महसूस होना
त्वचा का सूखना या पपड़ी बनना
खुजलाने पर संक्रमण का फैलना
कुछ मामलों में यह संक्रमण धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकता है।
किन हिस्सों में होता है ज्यादा?
टीनिया शरीर के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
जैसे—
शरीर की त्वचा पर – Tinea Corporis
सिर की त्वचा पर – Tinea Capitis
पैरों में – Athlete's Foot (Tinea Pedis)
कमर या जांघ के आसपास – Tinea Cruris
हाथों में – Tinea Manuum
हालांकि संक्रमण का कारण लगभग एक ही प्रकार का फंगस होता है।
मानसून में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
बारिश के मौसम में वातावरण में नमी काफी बढ़ जाती है।
लगातार पसीना आना, गीले कपड़े लंबे समय तक पहने रहना, त्वचा का ठीक से सूख न पाना और हवा का कम लगना फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं।
विशेष रूप से—
बगल
कमर
जांघों के बीच
गर्दन
पैरों की उंगलियों के बीच
जैसी जगहों पर संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
कैसे फैलता है यह संक्रमण?
टीनिया एक संक्रामक संक्रमण है।
यह कई तरीकों से फैल सकता है—
संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से
संक्रमित तौलिया, कपड़े या बिस्तर इस्तेमाल करने से
संक्रमित पालतू जानवरों से
जिम, स्विमिंग पूल या सार्वजनिक स्नानघर जैसी जगहों से
लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से
इसलिए व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
किन लोगों को अधिक खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोगों में इसका खतरा अधिक होता है।
जैसे—
जिन लोगों को अत्यधिक पसीना आता है
मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग
छोटे बच्चे
खिलाड़ी (Athletes)
लंबे समय तक बंद जूते पहनने वाले लोग
इन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
इलाज कैसे किया जाता है?
टीनिया का उपचार संक्रमण की गंभीरता और प्रभावित हिस्से के आधार पर किया जाता है।
डॉक्टर आवश्यकता अनुसार—
एंटीफंगल क्रीम
एंटीफंगल लोशन
मेडिकेटेड पाउडर
एंटीफंगल दवाएं
लिख सकते हैं।
यदि संक्रमण अधिक फैल चुका हो या बार-बार हो रहा हो, तो डॉक्टर मुंह से लेने वाली एंटीफंगल दवा भी दे सकते हैं।
बिना चिकित्सकीय सलाह के स्टेरॉयड युक्त क्रीम का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण और गंभीर हो सकता है।
बचाव के आसान उपाय
विशेषज्ञ मानसून में कुछ आसान सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं—
त्वचा को हमेशा साफ और सूखा रखें।
पसीना आने पर तुरंत कपड़े बदलें।
रोजाना साफ तौलिया इस्तेमाल करें।
दूसरों के कपड़े या तौलिया साझा न करें।
नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह सुखाएं।
सूती (Cotton) कपड़े पहनें।
लंबे समय तक गीले जूते या मोजे न पहनें।
पालतू जानवरों की त्वचा संबंधी समस्याओं का भी इलाज कराएं।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
यदि—
लाल चकत्ते लगातार बढ़ रहे हों,
खुजली असहनीय हो,
संक्रमण कई हिस्सों में फैल जाए,
घरेलू उपायों से राहत न मिले,
या बुखार जैसे अन्य लक्षण दिखाई दें,
तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) से संपर्क करना चाहिए।
घरेलू उपचार पर पूरी तरह निर्भर न रहें
सोशल मीडिया पर दाद के इलाज के नाम पर कई घरेलू नुस्खे वायरल होते रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों की वैज्ञानिक पुष्टि हमेशा नहीं होती। कई बार गलत उपचार संक्रमण को और गंभीर बना सकता है।
इसलिए स्वयं दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर होता है।
मानसून में त्वचा की देखभाल क्यों जरूरी?
मानसून में केवल टीनिया ही नहीं बल्कि फॉलिकुलाइटिस, फंगल रैश, बैक्टीरियल संक्रमण और एलर्जी जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।
ऐसे में त्वचा की नियमित सफाई, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना संक्रमण से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बारिश का मौसम जितना सुहावना होता है, उतना ही यह त्वचा संबंधी संक्रमणों का खतरा भी बढ़ा देता है। यदि त्वचा पर गोल लाल चकत्ते, तेज खुजली या जलन जैसी समस्या दिखाई दे, तो इसे सामान्य एलर्जी समझकर अनदेखा न करें। यह टीनिया या दाद का संक्रमण हो सकता है, जिसका समय रहते सही इलाज कराना जरूरी है। उचित स्वच्छता, डॉक्टर की सलाह और समय पर उपचार से इस संक्रमण पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है और इसे शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने से रोका जा सकता है।

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